Saturday, April 25, 2015

16 की उम्र में जेबखर्च से रखी थी कंपनी की नींव, आज 47 करोड़ का बिजनेस

व्यापार में कामयाबी हासिल करने के लिए उम्र कोई बंधन का काम नहीं करती। हम लोग अख़बारों में रोज बेरोजगारी की समस्या की खबरें पढ़ते रहते हैं. परेशान भी होते है इस बेरोजगारी की समस्या के  सोचकर; मगर हम भारत के कुछ युवा ऐसे भी हैं- जो अपनी अथक मेहनत और लगन से प्रेरणा स्रोत बने हुए है. उनमे एक ऐसा ही नाम है पल्लव नढ़ानी। 




कंपनी : फ्यूजन चार्ट्स टेक्नोलॉजिज
संस्थापक : पल्लव नढ़ानी
क्या खासइंटरेक्टिव फ्लैश चार्ट्स और डेटा विजुअलाइजेशन टूल बनाने वाली कंपनी जिसके क्लाइंट्स में लिंक्डइन, गूगल, फेसबुक, फोर्ड जैसे नाम शामिल हैं।

16 की उम्र में जेबखर्च सेरखी थी कंपनी की नींव, आज 47करोड़ का बिजनेसपल्लव नढ़ानी ने 16 साल की उम्र में जेबखर्च सेफ्यूजन चार्ट्स की नींव रखी थी। आजउनकी उम्र 29 साल है और वे गूगल , एप्पल, लिंक्ड इनव फेसबुक जैसी कंपनियों को सर्विस देते हैं।कंपनी : भागलपुर के मारवाड़ी परिवार में जन्मे पल्लव के घर में लग्जरी के नाम पर एक कम्प्यूटर था जिस पर वह घंटों बिताया करता था। कम्प्यूटर उसकेपिताजी का था जिसे वे अपने अकाउंट्स के काम के लिए इस्तेमाल करते थे। 1997 में पल्लव के पिता ने एक कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआतकी तो उनके रिश्तेदारों के बच्चे ट्रेनिंग के लिए उनके पास आए। वे अपने साथ कुछ किताबें भी लेकरआए थे। रात में सभी के सो जाने के बाद पल्लव ने इन किताबों को पढ़कर खुद सीखना शुरू किया।फिर पल्लव पिता के साथ कोलकाता शिफ्ट हो गया। यहां उसे ला मार्टिनेयर ब्वॉयज स्कूल में दाखिला मिल गया; जहां शहर के बेहतरीनस्टूडेंट्स पढ़ने आते थे। पल्लव भी इन्हीं की तरह बननेके लिए प्रेरित हुआ; और उसने कड़ी मेहनत करनेकी ठान ली।साधारण लड़के की असाधारण महत्वाकांक्षाएंहाई स्कूल स्टूडेंट पल्लव नढ़ानी को अपने स्कूलअसाइनमेंट्स के लिए एक्सेल में चार्ट्सबनाना जरा भी पसंद नहीं था। पल्लव के अनुसार-“ स्कूल असाइनमेंट्स के दौरान एक्सेलका कई बार इस्तेमाल करना पड़ता था और बोरिंग चार्ट्स मुझे  बिल्कुल पसंद नहीं थे।इसी नापसंद ने मेरे  दिमाग में एक इंटरेक्टिवचार्टिंग सॉल्यूशन तैयार करने केआइडिया को जन्म दिया।’’
 पल्लव ने एक वेबसाइटपर अपने इस विचार को लेकर कुछ लेख लिखे।इसकी शुरुआत जेब खर्च हासिल करने के मकसद सेहुई थी। इन लेखों के लिए उसेकाफी सराहना मिली और करीब 1,23,979 रुपए का मेहनताना भी। 11वीं कक्षा केस्टूडेंट के लिए 1,23,979 रुपए का मेहनताना कुछ कम नहीं था। इससे 16 वर्ष के इस युवक को बड़ा प्रोत्साहन मिला। उसने अपने विचारको कारोबारी जामा पहनानेका फैसला किया और 2001   मेंअपनी कंपनी फ्यूजन चार्ट्स टेक्नोलॉजिजकी नींव रखी।मुश्किलों भरी थी शुरुआतकंपनी की शुरुआत के तीन साल तक पल्लव ने अकेले ही प्रॉडक्ट डेवलपमेंट, वेबसाइट निर्माण,डॉक्यूमेंटेशन, सेल्स एंड मार्केटिंग और कस्टमरसपोर्ट के मोर्चे संभाले। इस दौरान उन्होंने सीखा कि ग्लोबल सॉफ्टवेयर कॉम्पोनेंटमार्केट कैसे काम करता है, कैसे अपनी ताकतको बढ़ाकर एक बेहतर गो-टू-मार्केटस्ट्रैटेजी बनाई जा सकती है।जब ऑर्डर मिलने शुरू हुए तो पल्लव ने 2005 ई०  में अपना पहला ऑफिस खोला और करीब दो वर्षके अंतराल में 20 लोगों की एक टीम खड़ी की।अब पल्लव को अनुभवी सलाह की भी जरूरत महसूस होने लगी क्योंकि उन्हें सरकारी नियमों और बैंकिंग फाइनेंस की ज्यादा जानकारी नहीं थी, वहीं उन्हें विदेशी क्लाइंट्स के साथ भी डील करना पड़ता था। इस परेशानी को हल करने केलिए उन्होंने अपने पिता की मदद ली।देश-विदेश में हुए फेमस 2009 ई०  में पल्लव ने कारोबार को विस्तार देने केलिए अपना ऑफिस कोलकाता का आईटी हब कहलाने वाले सॉल्ट लेक में शिफ्ट किया औरअपनी टीम के सदस्यों की संख्या 20 से बढ़ाकर 50 की। इससे पल्लव को बिजनेस बढ़ाने में सहायता मिली। 2010 ई०  में फ्यूजन चार्ट्सका ऑफिस बेंगलुरु में भी खोला गया। वर्तमान में दो शहरों से संचालित फ्यूजन चार्ट्स में 80 कर्मचारी और 21,000 से ज्यादा क्लाइंट्स हैं जिनमें लिंक्डइन, गूगल , फेसबुक , फोर्ड जैसी कंपनियां शामिल हैं।कंपनी ने धीरे-धीरे अपने पांव पसारे औरदुनिया के करीब 118 देशों के फार्मास्यूटिकल्ससे लेकर एफएमसीजी तक और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट सेलेकर नासा तक अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।इतना ही नहीं, अमेरिका के प्रेसिडेंट बराकओबामा द्वारा 2010 ई० में इस प्रोडक्टको चुना गया जिससे फ्यूजनचार्ट्सको इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहुंचने में बहुत मददमिली। महज 30 वर्ष के पल्लव नढ़ानी के बिजनेस नेआज 47 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया है।

Sunday, December 29, 2013


hiii guys 
 माफ़ी चाहता हूँ  आपको LOVE DIARY `  आगे गागे कहानी नहीं पढ़ा पाया था उसका रीज़न तकनीकी खराबी थी जो अब दूर हो गयी  अब जल्दी ही आपको आगे की अकहानी पढने के आई मीलेगी

अभी  नया  नॉवेल बाजार में आने वाला है मैं उसका ` tittle cover आपके सामने परस्तुत क्र  हूँ अगर पसंद आये अवशय पढ़ीयेगा मेरा होसला अफजाई कीजीएगा     

Thursday, August 23, 2012

new hindi film FANDAA audition in meerut

मुझे अपने पाठकों को जानकारी देते  हुए ख़ुशी हो रही है की हम अपनी film `फंदा` शुरू  करने  जा रहे है. हम पहला audition मेरठ में रख रहे है. film  की कहानी और बाकी लेखन का काम मेरा है। हम  पहला ऑडीशन हम मेरठ में क्र रहे हैं.जो 29 sep. to 5 oct  तक होंगे.ऑडीशन   जगह  वगैरह के बारे में film  के ऑडीशन पोस्टर पर आपको सारी जानकारी प्राप्त हो  जाएगी. वो इसी पोस्ट के साथ मैं आप तक पहुंचा रहा हूँ       आप 08979749700 या 08410364865 पर कॉल करके भी जानकारी ले सकते है.

 मेरी film  का वेब लोंक
http://www.facebook.com/pages/Fandaa/470416342982245
आप लोग चाहें तो वहां से भी जानकारी ले सकते है .
मेरठ ऑडीशन के बाद हम दूसरे  शहरों (देहरादून, चंडीगढ़, नॉएडा)में भी आयेंगे.

Tuesday, July 24, 2012

love diary 11

अध्याय 20
तारीख़ वो भी अगस्त की अंतिम सप्ताह की ही थी जब मेरे पास मेरी एक और सहेली वैभवी का फोन आया. वो मुझसे तीन साल बड़ी है. मेरे पड़ोस मेरहती थी।उसका बस  एक छोटा भाई ही था तो पडोसी होने के नाते वो मेरे करीब आ गयी.वो मेरे रिसेप्शन में भी आई थी.कुछ नोर्नल  बातें हुईं  चूँकि दोनों की मैरिड  थी कुछ  शरारती बातें भी हुई. फिर मैंने पूछा-" तू ये बता मेरठ कब आ रही है?"
" मैं तो जब तू कहे आ  जाउंगी।..?"- वो अधिकारपूर्ण भाव से बोली-" पर फिलहाल तू कल नोएडा आ रही है।"
"क्यों?"
"यार, मेरी मेरिज एनिवर्सरी है"- वो चहकी-"उसी को सेलिब्रेट करने के लिए तुझे बुला रही हूँ। कल शाम तक या शाम से पहले कभी भी अपने मियां को लेकर आ जा।"
"यार ......"
 " ओए ज्यादा टशन मत झाड.."-उसने बात बीच में ही काट दी-"तू  आ रही है तो आ रही है."
" यार, उनसे बात करके बताती हूँ।"
" बात-व़ात  कर  या मत कर ...."-उसने कहा-"अरे यार मेरे में मिलने के लिए एक रात  मियां की बांहों से अलग  नहीं गुजार  सकती? वैसे भी पार्टी आधी रात तक ही चलने वाली है. उसके बाद तू फ्री हो जाएगी. बाकी रात तू अपने मियां जी  की बाँहों में गुजर लेना।"
" ok, I will try..."-मैंने कहा-" उम्मीद हैं वो मान जायेंगे।"
" तू मनाएगी तो मानेंगे क्यों नही भला।."-वो आत्मविश्वास से बोली-" वो क्यब तेरी बात टालेंगे।"
मैं गहरी साँस लेकर रह गयी।
***
' वो' बिना हुज्जत के तुरंत तैयार हो गये।
सो।..
अगले दिन शाम को तकरीबन आठ बजे हम नॉएडा स्थित वैभवी के घर पहुँच गये।वहां  पर मैंने एक बात को खास तौर पर नोटिस किया कि वहां  पर किसी भी कपल के साथ कोई बच्चा नहीं था.
कुल मिलाकर वो एक कपल पार्टी थी.
जब हम वहां पहुंचे तो ज्यादातर मेहमान आ चुके थे. नाश्ते का दौर चल रहा था। वैभवी ने मेरा खुली बांहों से स्वागत किया। उसके मियां भी उसके साथ ही थे। हम दोनों के मियाओं के बीच भी शेक हैण्ड हुए, हेल्लो का आदान प्रदान हुआ।. हम दोनों ने एक दुसरे के मियां का परिचय करवाया. उसके मियां जी मेरे वाले को लेकर मर्दों की टोली की तरफ चले  गये. वैभवी ने मेरी कमर में हाथ डाला और मुझे लेडीज ग्रुप की   तरफ बढ़ गयी।
हालाँकि पार्टी लीविंग हॉल में ही चल रही थी। सब आपस की बातों में मशगूल थे नाश्ते के दौरान. मुझे लेडीज की तरफ  ले जाती हुई वैभवी फुसफसाई-" बड़ी कमजोर-सी लग रही है. रात को तेरे मियां जी तेरा ज्यादा `जूस` निकल देते हैं क्या?"
मेरा पूरा शरीर झनझना उठा मनो उसमे बिजली भर गयी हो। मेरा स्वर थरथरा रहा था, जब मैंने उसे दबे स्वर में डांटा -" shut-up"
वो बस  कुटिल भाव से हंसी.
मेरे भीतर `आह` उभरी।
इतने में हम लेडीज के पास  पहुँच गईं. वैभवी ने मेरा परिचय सबसे करवाया और फिर अच्छी मेजबान की तरह बोली-" बता क्या लेगी।....तू यहीं ठहर मैं लेकर आती हूँ"
" कुछ भी लाइट ही लेकर आना यार।.."-मैंने गुजारिश की-" सीधे घर से ही  आ  रहे है।"
" मुझे  पता है घर से ही आ रहे हो...."-वैभवी बोली-"कम-से-कम डोम घंटे का सफ़र है. वैसे क्या गारंटी है कि सीधे यहीं आ  रहे हो ....."-वो कहती- कहती कुटिल भाव से मुस्कुराई-" ये भी तो हो सकता है सुनसान जगह देखकर तेरा मियां जी तुझपर टूट पड़ा हो और ..."
"shut-up."-मैंने उसका कन्धा ठोका-"दिमाग बहुत  ख़राब हो गया है तेरा"
मगर  उसपर कोई  असर नहीं पड़ा. अपितु उसकी मुस्कान हंसी में तब्दील हो गयी, और  औरते भी अपने  लिपस्टिक से पुते होंठों पर मुस्कान सजाए मेरी तरफ देख रही थीं. उनकी नजरे यूँ मेरे बदन का जायजा ले रही  थी मानों हमारे द्वारा रस्ते में की यी शरारतों के सुबूत ढूंढ रही हों। हर नजर मुझे अपने बदन में चुभती सी महसूस हो रही थी।  मैं परे देखने  लगी।
हल्का फुल्का नाश्ता चलता रहा, तभी वैभवी मेरी बांह पकडकर धेरे से अधिकारपूर्ण भाव से बोली-" चल तुझसे बात करनी है।"
मैं उलझी मगर मेरे इंकार की कोई वजह नहीं थी। सो जब वो चल दी तो मैंने उसे फोलो किया।
 ***