Monday, April 12, 2010

some facts 2

* अगर आप youtube पर लोड की गयी सभी videos को देखनेव लगें तो तमाम videos देखने में आपको तकरीबन ६०० साल लग जायेंगे youtube पर हर मिनट में २० घंटे की videos upload ki जाती है।
*इब्न-बतूता का जन्म २४ फरवरी १३०४ को मेरिडीन राजवंश के दोरान मोरक्को के तंजोर शहर के एक मुस्लिम विधिवेत्ता के घर में हुआ था।
*फिल्म `पिरान्हा-२:दा स्पानिंग`के दोरान director जेम्स केमरून के निर्माता के साथ एडिटिंग को लेकर इतने मतभेद हुए कि उन्हें डरावने सपने आने लगे थे कि भविष्य से मशीन मानव सिर्फ और सिर्फ उन्हें मारने आ गया है .....
यही सपना उनकी हिट फिल्म `the tarminator` की कहानी का बेस बना।
*विश्व के ११० देशों में २.५ करोड़ से भी ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते है। अमेरिका में ३८% डोक्टर, १२५ scientists, 36% nasa workers भारतीय मूल के है। microsoft में 34% I.B.M. में, २८% इंटेल में, १७% कर्मचारी भारतीय मूल के है।
* वर्ष २००९ के best director का oscar award जीतने वाली निर्देशक केथरीन बिगेलो ने अपने पूर्व पति जेम्स केमरून (अवतार के निर्देशक ) को पछाड़कर वो खिताब जीता है।
*महान नाटककार जयशंकर प्रसाद जी ने अपने प्रसिद्द नाटक `चन्द्रगुप्त` की प्रस्तावना में सिद्ध किया है कि`कामसूत्र` के लेखक `वात्स्यायन` और चाणक्य एक ही आदमी थे
चाणक्य द्वरा लिखित ग्रन्थ है - चाणक्य नीति, अर्थशास्त्र, कामसूत्र, और न्यायभाष्य।

Wednesday, March 31, 2010

some facts 1

*इंडिया १५ अगस्त को आजाद हुआ था लेकिन उसे united national organigation ka member 30-10 1945 को बना लिया गया था
मेरी समझ में नहीं आ रह की अगर ये सच है तो ३०-१०-१९४५ इंडिया को एक आजाद देश का दर्जा मिल गया होगा- तो कांग्रेस देश को आजाद करने का क्रेडिट क्यों लेती है??????
*आधुनिक जासूसी के पितामह wilhelm johann kark eduard stieber जो बिस्मार्क का मुख्य जासूस था जब १८९२ में मरा था तो यूरोप के तमाम सामंत उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होने आये थे। इसलिए नहीं की वो उसे बहुत प्यार करते थे बल्कि इसलिए क्योंकि वो खुद देखना चाहए थे की क्या वो सचमुच ही मर गया है या मरने का ड्रामा कर रहा है।
*लेखक गुरुदत्त ने ५५ साल की उम्र में लेखन कार्य शुरू किया था।
*एक magazine ने हाल ही में रिपोर्ट पुब्लिश की है जिसमे बताया गया है की बिहार में कई जगहों पर लड़की वाले दहेज़ से बचने के लिए जबरन लडको का अपहरण करके बन्दूक की नोक पर उनकी शादी अपनी लड़की से करवा रहे है।
*james bond 007 के लेखक Ian Flaming खुद वास्तव में ब्रिटिश नोसेना के ख़ुफ़िया विभाग में जासूस थे। उन्होंने हिटलर के दाहिने हाथ कहे जाने वाले जर्मनी के डेपुटी फ्यूहर को डिफेक्ट करने पर मजबूर कर दिया था।
=>डिफेक्ट का मतलब गद्दारी करके दुश्मन के खेमे में शामिल हो जाना होता है

Saturday, March 27, 2010

सरकार बजट और हम

ये पोस्ट जरा देर से लिख रहा हूँ उसकी कई वजह है। पहली वजह तो यही है की इस मुद्दे पर लिखने के लिए सब कुछ बड़ी ही सावधानी से समझना था मेरे लिए तो बात को समझना ही मुश्किल काम है,बजट जैसी चीज को समझना और भी मुश्किल। ऊपर से मैं कोई नेता भी नहीं जो वोट बैंक के लिए किसी भी मुद्दे को पकड़ कर बयान दे डालूं। ऊपर से नेट पर स्पीड की प्रॉब्लम थी कई बार पोस्ट को टाइप करने का इरादा बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। एक और वजह मेरी समझ में ये न आना था की किस तरह इस बोरिंग टॉपिक को इंटरेस्टिंग बनाकर लिखा जाये।
हाँ जी तो शुरू करें। सब जानते थे की बजट अच्छा ही होगा आखिरकार कांग्रेस के संकट मोचक श्री श्री श्री प्रणव मुकर्जी साहब ने बनाया है। उनकी स्मार्टनेस पर कोई शक कर सकता है भला भैया अपने कई दशक के राजनीतिक जीवन में चाचा अब जाकर जंगीपुर से लोकसभा चुनाव जीत सके है मगर इंदिरा जी तक उनके हर बार चुनाव हार जाने के बावजूद उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल करके रक्ति थी मात्र उनकी स्मार्टनेस के के कारण। सोनिया जी ने उन्हें वित्त मंत्रालय गिफ्ट किया है जो की उनकी काम करने के लिए पसंदीदा जगह है। तो भैया बजट तो अच्छा बनना ही था बना भी विरोघियों के अलावा सबने अच्छा बताया भी। वैसे भी कोई खास बड़ी समस्या इस बार थी भी नहीं। न तो चुनाव पास थे जो लोगों को वोट के लिए कोई लोलीपोप देनी होती। मंदी फिलहाल गुजर चुकी है। बस तीन ही problems मुकर्जी चाचा जी के सामने थीं।१ -बजट घाटा कम करना २-देश के विकास को गति देना ३-महंगाई को काबू करना। मुकर्जी चाचा का कहना है की वो घाटा पिछली बार के घाटे ६।९% से कम करके ५.५% पर लेकर आयेगे। ज्यादा दिक्कत वाली बात नहीं थी वजह इस बार की सरकार की अलग से होने वाली बचत और कमाई पर नजर डालने पर अपने आप समझ में आ जाएगी * विनिवेश से कमाई - १५००० करोड़ रूपये *3G की नीलामी से कमाई - ३५००० करोड़ रूपये *ऋण माफ़ी योंजा के खात्मे से हुई बचत - १५००० करोड़ रूपये *पेट्रोल उत्पादों की सब्सिडी जारी न करने से बचत - १०००० करोड़ रूपये *वेतन आयोग का बकाया न चुकाने से बचत - २०००० करोड़ ।रुपये कुल बचत - ९५००० करोड़ रूपये कुल G. D. P. -69.45 लाख करोड़ रूपये यानी बचत =G.D.P. का १.४%। पिछला राजकोषीय घाटा G।D.P. का ६.९%था सो इस बार घाटा रहने की उम्मीद है ६.९%-१.४%=५.५%. भैया जी मुकर्जी चाचा ने ५.५% राजकोषीय घटा रखने का ही वादा तो किया है । मुश्किल ही क्या है ?????? इसके अतिरिक्त कर से होने वाली कमाई अलग है। ये भी जुदा बात है - इस समय कर्ज ३.८१ लाख करोड़ रूपये है जिसका ब्याज ही हर साल ३२७५० करोड़ रूपये जाता है जबकि पिछले तीन सालों में कर की बढ़ोतरी ही कुल २१% रही है कर्ज की बढ़ोतरी रही ५५%. खैर डाटा तो बहुत हैं उनको लिखकर आपको नहीं पकाऊंगा #दूसरा वादा मुकर्जी चाचा ने समग्र विकास का किया है यार विकास तो हो ही रहा है वो होता रहेगा ही सब जानते है उसके लिए सरकार को कोई खास कोशिश करने की जरूरत है ही नहीं सब जानते है नहीं। इस समय देश की सबसे बड़ी दिक्कत है महंगाई। अगर देख जाये महंगाई कोई हर क्षेत्र मैं है भी नहीं। मोबाइल, t.v. की कीमतें पिछले कई सालों से कम हुई है। मकान की जमीन की कीमत बढ़ी है जिसमे भू माफिया का बहुत बड़ा हाथ है। लोगों के पास पैसा भी बढ़ा है पैसे का फ्लो बढ़ने से कीमते भी बढती ही है। सबसे बड़ी दिक्कत है खाद्यान की कीमत का बढ़ना उसमे भी सबसे बड़ी कमी है हमारे बुनियादी ढाचे में। आप खुद ही सोचो कई सको से आलू की बम्पर पैदावार हो रही है उत्तर प्रदेश में किसानो को जमकर नुक्सान हुआ। एक साल अखबार में खबर आई की पटना में सब्जियां लोगों ने खरीदार न मिलने के कारण सडकों पर फेंकी थी। क्या सरे देश में सब्जियों की पैदावार बम्पर हुई थी ? अगर हुई थी तो सब्जियां महँगी क्यों है???? सच तो ये है की देश के पास न तो कोल्ड स्टोर्स हैं न ही प्रचुर मात्र में फ्रीजिंग वेंस हैं ताकिजल्दी खराब हो जाने वाली सब्जियों को दूर की मंडियों में पहुँचाया जा सके देश के टोटल कोल्ड स्टोरों में से ७५%-८०% स्टोरों को सिर्फ आलू के संग्रहण के लिए यूज किया जाता है। यही असली सर दर्द है सरकार के लिए जिससे निजात पाने की कोश्शिश इस बजट में की गयी है। #ने कोल्ड स्टोर,पोल्ट्री,मत्स्य पालन,समुद्री उत्पाद और मांस के कारोबार के विस्तार लिए या नयी इकाई की शुरुआत के लिए छूट के प्रावधान रखे है। #परियोजनाओं को मूल उत्पाद शुल्क के रूप में ५%कर देना होगा साथ ही एडिशनल ड्यूटी ऑफ़ कस्टम और स्पेशल एडिशनल ड्यूटी इ भी छूट के साथ इन परियोजनाओं को सस्ती उधारी की भी सविधा मिलेगी । #ट्रक रेफ्रिजरेशन को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया गया है #कुछ कृषि उपकरणों का सीमा शुल्क ७.५%से कम करके ५% कर दिया गया है। गौरतलब है कोल्ड स्टोरेज को पिछले बजट में ही बुनियादी ढांचा का दर्जा दिया जा चुका है ताकि उन्हें आय कर में छूट मिल सके इससे अन्य कृषि उत्पादों के लिए स्टोर खोलने को बढ़ावा मिलेगा। सच तो ये है की ये एक दम से फायदा देने वाले कदम नहीं है इनका परिणाम आने में वक़्त लगेगा। हालाँकि देश की जनसँख्या बहुत है उसकी जरूरत पूरी करने के लिए काफी उत्पादन में भी बढ़ोतरी करने के साथ कला बाजारी को भी रोकना क्योंकि जब भी किसी चीज की कमी की खबर बाजार में आती है सेठ उसकी जमाखोरी शुरू कर देते है और कीमते बढ़ जाती है। खैर इस बारे में तो ज्यादतर जगहों पर पढ़ चुके होंगे मेरी तो ये ही समझ में नहीं आता की लोग बजट को इतना महत्त्व क्यों देते है ???? बजट है ही क्या बस साल भर का लेखा जोखा , और कुछ नहीं। हर बजट पर लोग इस बात पर निगाह गडाते है की उन्हें क्या मिला ??? यार कभी किसी ने ये सोचा है की उसने देश को क्या दिया ??? सब जानते है की ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार फैला पड़ा है .........सच तो ये है की अगर सरकार के १००% मदद गरीब को इमानदारी से मिले तो देश आज की तारिख में विकसित देशो की लाइन में खड़ा होता और देश को नयी पंचवर्षीय योजना की जरूरत न होती। देश को घाटे का बजट न बनाना पड़ता न ही देश पर आज ३.८१ लाख करोड़ रूपये कर्ज होता-अगर सब नागरिक इमानदारी से कर देते। आपको क्या लगता है इस मंदी से देश इतनी आसानी कैसे निकल गया ???? सरकार कितनो को मदद दे सकती है दरअसल लोगो के पास पैसा दबा पड़ा होगा तभी तो वो झटका झेल गए। सब जानते है यार सरकार की मशीनरी कितने तेजी से काम करती है। लोगों ने धर्म और समाज के नाम पर संश्थाये खोल रखी है ताकि कर न देना पड़े। भैया अगर कमी हो रही है लोग करोडो रूपये कम रहे है तो उनका उपभोग भी कर रहे है तो कर क्यों नहीं देते????? बजट आते ही पूरा व्यापारी वर्ग ये नजर टिकाकर बैठ जाता है की सरकार ने उन्हें क्या दिया। नेताओ के कहे पर लोग सडको पर उतर आते है की इस चीज में सब्सिडी क्यों नहीं दी उसमे सब्सिडी नहीं दी क्या किसी ने उस समय अपने गिरेबान में झांककर देखा है की वो देश दे लिए कितना इमानदार है ???? सरकार कहाँ से सब्सिडी देती है-जो टैक्स उसे मिलता है उसी से न ????? टैक्स कितने लोग इमानदारी से देते है???? अगर १०० रूपये सरकार किसी परियोजना को देती है तो कितने परियोजनाओ में लगते है सब जानते है।

Wednesday, February 17, 2010

प्यार का funda

सुना है प्यार काफी शानदार `शै` है ।ये हैवान को इन्सान बना देता है । प्यार इंसान को अमर बना देता है। प्यार जेवण को स्वर्ग बना देता है
पर मुझे कभी ऐसा कुछ नजर नहीं आया। वजह शायद ये हो ली मैं आज तक एक भी लड़की नहीं पटा सका। पटाना तो दूर तवज्जो तक हासिल नहीं कर सका । ये अलग बात है की कोशिश बहुत की । बार- बार नाकाम होकर भी आशा जरूर है शायद कभी न कभी चिता पर लेटने से चार पाँच मिनट पहले ही सही मुझ गधे को पंजीरी खाने को मिल ही जाये ।हा-हा-हा-।
चूँकि अपुन ने प्यार का स्वाद चखा नहीं सो अपुन की भेजे में प्यार का फंडा घुसा ही नहीं । इस बारे में अपुन ने सोचा तो प्यार की रूमानियत के पीछे पंगे, बदनामी, तकलीफे, ही नजर आयी या वक्ती झाग या कमीनापन या वो बेवकूफी जिसे दिल की सुनकर कर चुकने के बाद ........रिपीट - कर चुकने के बाद .............दिमाग की अत्कार सुनने को मिलती है। जेहन में बस उबलते पछतावे के लावे में आत्मा को जलना होता है।
* क्या प्यार हैवन को इंसान बना देता है ??????
अगर ऐसा है तो क्यों प्रपोजल स्वीकार न करने पर लड़कियों के चेहरे पर दिलजले तेज़ाब फेंक देते है ????? क्यों लोग प्यार में हत्याए कर देते है??????????????
*क्या प्यार जिन्दगी को जन्नत बना देता है ????
हमारे गाँव में एक लड़का था । घर का लाडला माँ बाप के खिलाफ लव मेरिज की बाध्य दिमागदार मन जाता था। शादी के बाद लाइफ का बैंड तो बजा ही जिन्दगी भर उसकी बीवी लडकियों को यही कहती रही की कोई उसकी तरह न करे।
*क्या प्यार इबादत है?????
शायद हो । सवाल ये है ----लड़के- लडकिय एक दूजे के प्यार को पाने के लिए माँ- बाप का प्यार क्यों भूल जाते है। माँ बाप की सालो की ममता पर उनका `प्यार` क्यों भारी पड़ता है??? क्या ये प्यार माँ-बाप की सालों की तपस्या से बड़ी चीज है???? और अगर है तो क्यों बाद में आशिक पछताते है?? क्यों २६% लव मेरिज करने वालो ने अपने विवाहेत्तर सम्बन्ध की को स्वीकार किया है ।ध्यान दें की बस स्वीकार किया है जिन्होंने नहीं माना वो जरूरी नहीं पाक-साफ़ हों । इसके अलावा एक बात मेरे में पैदा भी होती है । प्रेमियों बुरा मत मानना यारो-अगर कोई अपने पैदा करने वालों के लिए ही संवेदनशील नहीं तो वो अपने spouse के प्रति ईमानदार कैसे हो सकता है ?????? जिसने उन माँ-बाप की भावनाओ की कद्र नहीं की -जिन्होंने उन्हें पाला-पोसा, पढाया,उसकी केयर की- वो अपने spouse की फीलिंग्स की क्या क़द्र करेगा???? ये सोचकर मेरा दिमाग भन्ना गया । आत्मा ने कहा की प्यार नाम की कोई चीज दुनिया में होती ही नहीं ।
ये तो हुई वो बात जो मैंने देखा और सुना अब अपनी बखिया उधेड़ता हूँ । वैसे तो मैं बड़ा कमीना इंसान हूँ लेकिन हमेशा से कमीना इंसान नहीं था मुझे पहली बार जो लड़की पसंद आई या लिखू में खुद ही जिस लड़की की तरफ खीचा चला गया वो मेरे सामने सातवीं कक्षा में आई तब मैंने सोचा काश ये मेरी बहन होती ये न होती तो इसी के जैसी होती ...........सचमुच बड़ी cute लगती वो मुझे थी (यार अब भी काफी क्यूट है )और में हमेशा एक प्यारी सी बहन की ख्वाहिश करता था। और बाद में ............ । उसी की सहेली पर नजर टिकी और मैं उसपर लाइन मारने लगे ...सोरी `प्यार' करने लगा उसे। क्यों?? क्योंकि तब मैं अपनी लाइफ पार्टनर की कल्पना करने लगा गया था। मामला उसी तक नहीं टिका कईओं पर लाइन मारी। मार रहा हूँ। एक बुक स्टाल पर कभी कभार बैठकर किताबें चाटता हूँ हर सब्जेक्ट पर। वहां मुझसे अच्छे standerd ki बड़ी धांसू-धांसू लडकियां किताब लेने आती हैं। वहां जब किसी सी इंटरेक्ट करने का मोका आता है तो दिल में आवाज उठती है बस भैया ना कह दे। वैसे पता है की कोई भाव नहीं देगी कभी भी भाव नहीं देगी लेकिन `भैया' सुनकर दिलपर आरी सी चल्री है। क्यों .........ये भी कोई पूछने वाली बात है यार?????????
सवाल ये है की मैंने प्यार किसे किया -उसे जिसे अपनी बहन बनाना चाह ( हालांकि उसके लिए शायद मैं अब भी बुरा इसान होऊ ) या उसे जिसपर पहली बार लाइन मारी या उन्हें जिनपर लाइन मार रहा हूँ या उन्हें जिनपर लाइन मारने वाला हूँ क्योंकि तय है की कोई भाव नहीं देने वाली आगे तो बढ़ना ही पड़ेगा न आखिरकार।
वैसे भाइयों ऐसा नहीं है की प्यार करने वाले नाकाम ही होते है। हमरे एक प्राचार्य जी ने भी सुना है लव मेरिज की थी दोनों कामयाब भी थे और खुश भी थे। celebtities की लव मेरिज की खबर तो सब पढ़ते ही रहते है साथ ही रिश्ता टूटने की भी न्यूज़ आप तक आती रहती ही है काफी जोड़ियाँ कामयाब भी रही है। पर , अब भी मेरा मानना यही है की ये जोडियाँ इसलिए कामयाब नहीं की उन्होंने `प्यार' किया बल्कि इस वजह से कामयाब है की उन्होंने रिश्ते की कीमत को समझा और निभाया। उन्होंने `प्यार' के आसमान में परवाज तो भरी मगर रिश्ते की हकीकत की जमीन पर भी पैर टिकाये रखे।
दोस्तोंअब मैं `प्यार' के अपने funde पर आता हूँ । मैं हमेशा की तरह अब भी ताल ठोककर कहता `प्यार' नाम की कोई चीज इस दुनिया में नहीं होती। होता है या तो रिश्ता या फिर महज आकर्षण। हम अच्छी चीज की तरफ आकर्षित होते है और तब तक उसकी और आकर्षित रहते है जब तक वो अच्छी और आकर्षक बनी रहे । जबकि रिश्ता बस रिश्ता होताहै वो कभी ख़त्म नहीं होता कोई ताकत रिश्ते को मिटा नहीं सकती। अब ये हमारी सोचा है - हम आकर्षण के गुलाम बनते है या साश्वत रिश्ते को जीते है। ख़ुशी क्या है रेगिस्तान में भी लोग आशियाना बनाकर ख़ुशी को अपना गुलाम बना लेते है वहां हरियाली पैदा कर देते है वर्ना कश्मीर जैसी जन्नत को हम ही इंसानों ने आतंक से जहन्नुम बना दिया है वहां की वादिय तो बस खामोश है ।
हो सकता है मेरा funda आप लोगो को पसंद ना आये या हो सकता है की मैं भी किसी खास लड़की को बहुत importance देता होऊ उसी की वजह से और लड़कियों को पास ही न आने देता होऊ ताकि `उसके' लिए जगह खाली बनी रहे (यार इतना झूठ तो चल जाता है हा-हा-हा-हा) किन्तु ये तय है -अगर मजबूरी वश या दुर्घटना वश शादी की तो मेरी बीवी ही सबसे ज्यादा important होगी सबसे सेक्सी होगी नहीं होगी तो मैं बना दूंगा ।
वैसे एक बात पक्की है की जब तक शादी जैसी दुर्घटना मेरी लाइफ में नहीं घटती जब तक किसी हसीना ( हसीं तो पक्की होगी ही) मेरे साथ बंधकर नहीं फूटते तब तक मैं लाइन मरता रहूँगा । दिल लगाकर बिना spaceship के चाँद पर लैंड करने की कोशिश करता रहूँगा आखिरकार इन फालतू कामो का अपना ही मजा है। वैसे भी guys अगर हम लफंगे लड़कियां पर लाइन नहीं मारेंगे तो उन्हें अपने हसीं होने का अहसास कैसे होगा ?????? और क्या पता कोई हसीना बेवकूफ बनकर मुझे धाकड़ बंद मान ले और मेरे भाग्य का पिटारा खुल जाये। वैसे भी किसी को हसीं होने का अहसास कराना भी क्या कम धर्म-कर्म का काम है?????????? सो भाइयो अपुन का इरादा धर्म-कर्म से पीछे हटने का जरा भी नहीं है मैं तो करता रहूँगा आप बोलो आपका क्या इरादा है?????

Monday, February 1, 2010

मेरा टूटता बिखरता देश

मैं कोई देशभक्त बन्दा नहीं हूँ मगर कहते है न की आप माँ को भले ही प्यार न करते हूँ फिर भी अगर माँ पर संकट आता दिखे तो हर बेटा सोचने लगता है मैंने भी सोचा। आज की तारीख में तकरीबन १२ नए राज्यों की मांग जोर पकड़ रही है तेलंगाना का मुद्दा सबसे ज्यादा गरमा रहा है। विदर्भ के लिए भी कम जोर नहीं लग रहा।
नेता लोग कहते है की छोटे राज्यों से विकास होता है। जैसे झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, का हो रहा है। नागालेंड, manipur, tripura, के विकास को कौन नहीं जानता । राजनीती वहां की इतनी स्थिर है कि दो विधायक ही सत्ता बदल डालने कि ताकत रखते है। बहुमत के लिए विधायक चाहिए ही कितने।
अमेरिका का उदाहरण देते है जहा ५० राज्य है पर शायद भूल गए कि उसका आकर भारत से तीन गुना है इस तरह तो वहां ८० राज्य होने चाहिए जबकि वहां इतने ही राज्य अमेरिका के बन्ने के समय थे उतने ही अब है एक भी नया राज्य नहीं बनाया गया ।
मामला दरअसल देश के development का नहीं है अलग राज्य की मांग वो नेता कर रहे जिनका कोई राष्ट्रया आधार नहीं चन्द लोगों को इकठ्ठा करके नया राज्य गठित कराकर वो सत्ता में आना चाहते है और सेंटर में बैठे लोग भी एक मुट्ठी लोगों के समने झुककर अपना वोट बैंक खो देने के डर से उनकी मांग को ममन लेते है
आज दए लोग नया राज्य मांग रहे है कल को दए नया देश मांगने लगेंगे। क्या मुश्किल है यार ?????संयुक्त राष्ट्र में समर्थन ही कितने देशो का चाहिए नया देश बनाने के लिए शायद २४-२५ या इससे कुछ ज्यादा। सब जानते है हमारी intelligence agencies के क्या हल है ??? raw के ज्यादातर अधिकारी अमेरिका परस्त है । लगभग ७५% रिटायर होकर अमेरिका में बसते है। जब अमेरिका और चीन जैसे देश भारत को नुकसान पहूचना चाहते हों तो उनके लिए २४-२५ देशो का समर्थन इकठ्ठा करना कितना मुश्किल है ??????
देश टूटता तो क्या हाल होता है हमसे ज्यादा बेहतर कौन जन सकता है । अपने देश के ह्स्सो में चीन को घुसने से तो हम रोक नहीं पा रहे है पाकिस्तान से कश्मीर तक हासिल नहींकर पा रहे है क्या देश को टूटने से बचा पायेंगे ??????

डर लग रहा है कहीं इन स्वार्थी नेताओं की वजह से मेरी माँ के टुकड़े न हो जाये । जाग जाओ यार कब तक सोते रहोगे ????????????????

Tuesday, January 12, 2010

sex scandle की चांदनी

एक हैं tiger woods. स्टार है। आज कल चर्चा मैं है भाई साहब अपनी कार मे सफ़र कर रहे थे एक पत्रिका में रखी अपनी girlfriends की तस्वीरे देख रहे थे -अन्तरंग टाइम वाली । एक टक्कर हुई और सारी तश्वीरें बिखर गयी और बात मीडिया तक चली और पोल खुल गई। भाई साहब बदनाम तो हुए साथ ही अब बीवी भी साथ छोड़कर जा रही है मामला कोर्ट में जाने वाला है।
खैर
मामला अब ये है इस scandle का फायदा किसे हुआ ???
कहते है जब रात में चांदनी बरसती है तो समझदार लोग उसे जमकर लूटते है और लूटी भी यार जैसे -
१- भाई साहब तब `ग्रेट अ ग्रिप ऑफ़ फिजिक्स - पढ़ रहे थे तब तक वो कुल ही २२६८ बिकी थी अब तक ४००००० के आस पास बिक चुकी है।
२ - जिस कार में बैठे थे उसकी बिक्री का आंकड़ा दोगुना हो चूका है
3- प्रेमिकाओ की sudh ले लेते है
i- जेमी ग्रेब्स एक वेट्रेस थी अब वो १० लाख डॉलर- लेकर playboy के कवर पर आने वाली है ऐसा सुना है
ii- रशल ( एक क्लब के vip सेवाओ की director ) और बैर पूल लांग की मार्केटिंग director कलिका मेकिन अब तक परसिद्ध हो चुकी है।
iv -porn stars holly simpson और joslin james की मार्केट में इजाफा हो ही चूका होगा।
v- मीडिया तो चांदी काट ही रहा है
अब पत्नी की बात करते है । दुनिया की कोई पत्नी नहीं जो अपने पति के एब न जानती हो खासकर तब - जब बन्दे के कई चक्कर चल रहे हों । पत्नी ने तलाक की बात तब क्यों नहीं की ??????
तब उसे शायद पैसा मिलने की गारंटी न हो अब पक्के तोर पर गारंटी ज्यादा है सो तलाक लाइन की बात कर रही है

मेरा इरादा वूड्स भैया को दूध का धुला प्रूव karna नहीं जो गलत है वो गलत है ही
यार मेरी समझ में आज तक ये नहीं आया की लोग कई औरतों के साथ रिश्ता कैसे बना लेते है ????????
एक औरत की शारीरिक जरूरत मर्द से ज्यादा होती है
डाटा उठा लो
एक सर्वे के अनुसार ९०% औरतों ने कहा की वो अपनी sexual life se satisfied हैं उनमे से मात्र २०% ने कहा की ओ पूरी तरह satisfied है। manaa ये भी जाता है की औरत की शारीरिक जरूरत मर्द से आठ गुनी होती है । बहुत औरतों को तो orgasm की जानकारी ही नहीं होती उन्हें orgasm कभी मिला होगा तभी तो उसके बारे में पता होगा ना यार।
तो मेरे भाइयो एक की जरूरत तो पूरी नहीं होती लोग दूसरियों के चक्कर में क्यों आ जाते है ????????

Monday, December 28, 2009

शोला और शबाब

एक तरफ शोला,

एक तरफ शबाब।

देखा था एक ख्वाब,

जो यूँ ही टूट गया।

पाया इक साथी

इक पल में छूट गया।

दिल में छुपी थी जो हसरत-

वो दिल में ही रह गयी।

न हम कुछ कर पाई,

न वो कुछ कह गयी।

धक् से रह गया था दिल-

जब वो लगी थी जाने

मुसूकुरा रहे थे हम,

पर दिल की हालत हम ही जाने।

न करना मोहब्बत यारो,

नहीं तो पछताओगे।

इस शोला और शबाब के चक्कर में यूं ही फंस जाओगे

Saturday, December 26, 2009

*वो कंगन की खन-खन,

वो पायल की छन-छन,

और साथ में उसका मुस्काना,

आंचल को दबाकर दांतों में-

याद आता है उसका शर्माना।

*देखा है लोगों को इकरार करते हुए,

काँटों की सेज पर भी प्यार करते हुए,

कभी तो उनको हमारी याद सताएगी,

किसी मोड़ पर मिलेंगे वो हमें इंतजार करते हुए.

Thursday, December 17, 2009

शायरी

ले छोड़कर तेरा दामन हम आगे को चल दिए,
कोई दामिनी ही सही, मेरा आशियाना रोशन तो बनाएगी