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Thursday, May 17, 2012

something abt my new book

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=36&edition=2012-05-17&pageno=24#id=111740631371097072_36_2012-05-17


यह सीधा सादा उपन्यास है। कुछ हद तक इसे एंटरटेनिंग, रोमांटिंक और
पति-पत्‍‌नी के बीच सेक्स को प्रभावी तरीके से रखने का प्रयास है। फिर भी
आप ये नहीं कह सकते कि उपन्यास कोई स्पष्ट मैसेज देता नजर नहीं आता है।
कुछ हद तक इस पुस्तक में परिवार के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए
दांपत्य को बनाये रखना कितना महत्वपूर्ण होता है के ऊपर आधारित है। इस
पुस्तक में पति-पत्‍‌नी के उस नाजुक रिश्ते को टच करने का प्रयास किया
गया है, जिसमें पति अपने स्पाउज को फिजिकली सटिसफाई नहीं कर पाता। इस बात
को लेकर उपन्यास में पति-पत्‍‌नी के बीच एक सार्थक संवाद पैदा करने की
कोशिश की गई है। इस काम में लेखक कितना सफल हुए हैं इसे आप पढ़कर खुद ही
अंदाजा लगा सकते हैं। दोनों के बीच जारी संवाद में ये बात भी उभरकर आता
है कि ये सब बकवास है कि कौन परफेक्ट है और कौन नहीं। सही मायने में तो
कोई भी पति पत्‍‌नी की चाहत हो पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर सकता। दोनों
के बीच मतभेद के कारण भी यही होते हैं। यह दांपत्य जीवन में कभी कभार कटु
अनुभवों के दौर तक पहुंचता है तो कभी शांत भी हो जाता है। यह क्रम चलता
रहता है। समझदारी का अभाव रखने वाले लोग इसी बात को लेकर भ्रम में फंसते
हैं और उसका परिणाम कई बार मौत को अंजाम देने तक पहुंच जाता है। मगर
जैविक आवश्यकताओं की सही समझ रखने वाले व जिंदगी को करीब से जानने वाले
समझदार लोग स्थिति में उसी रूप में स्वीकार करते हैं जिस रूप में उनके
सामने वह आता है। ऐसे दांपत्य संतुष्टि-असंतुष्टि दोनों के बीच लाइफ को
खूबसूरत बनाने में जुटे रहते हैं और वही जिंदगी को सही मायने में जीने
में कामयाब भी होते हैं। -सिटी रिपोर्टर

Tuesday, September 27, 2011

क्या ये सही है???????????

ये केस मेरठ का ही है.एक लेखक महोदय ने अपने नॉवल में एक जाति के बारे में वक आपत्तिजनक बात लिख दी. उस जाति के लोगों ने हंगामा मचा दिया. केस भी ठोक दिया. चूंकि वो जाति राजस्थान से समबम्ध रखती है सो केस राजस्थान में ही चला और लोग वहीँ पर जाया करते थे. तीन लोगों पर केस चला लेखक प्रकाशक और मुद्रक. तीनों लोगों की सात साला तक परेड हुई-यानी सात साल तक उनपर केस चला.
सात  साल तक  वो लोग खुद को सही सिद्ध करने में लगे रहे. सात साल केस लड़ने के बाद वो  लोग केस हार गये. उनपर सजा के रूप में ५००-५०० रूपये का आर्थिल दंड लगा.
मेरी उन प्रकाशक साहब के रिश्तेदार से बात हुई जो केस में गवाह के तोर पर जाया करते थे. उन्होंने मुझे बताया की उन ५०० रुपयों को पे करने के बाद सब लोग हैरान थे-उनकी समझ में ये ही नहीं आ रहा था कि उन लोगों ने वो केस लड़ा ही क्यों????? 
अगर सजा इतनी  छोटी-सी थी तो उसके लिए सात साल तक लड़ने कि जरूरत ही क्या थी???वो शुरू में ही वो माफ़ी मांग लेते और वो उस सजा को भुगत लेते.
मैंने बाद में थोडा सा इसके बारे में सोचा. 
मेरा मानना है कि उनको जो इतनी दिक्कत का सामना करना पड़ा  उसकी वजह था वकील. उसे जरूर कानून की जानकारी होगी उसने मात्र अपनी फीस को कमाने के लिए उन्हें इतने टाइम तक उन लोगों को केस में उलझाये रखा. 
सच तो ये है वकील का काम जनता तो कानून की पेचीदगियों से बचाना होता है वही कानून ने अनजान लोगों को काटने के लिए केस में उलझाये रखते है. 
मैं मात्र वकीलों की बात नहीं कहूँगा. हल पेशेवर आदमी थोडा सा ज्यादा कमाने के लिए अपने फर्ज से गद्दारी करता है.
क्या ये सही है???????????

Sunday, September 26, 2010

fact file4

फिल्म ` मुगल- ऐ-आजम'  के सीन को -जिसमे दिलीप कुमार मधुबाला के फेस पर नाजुक पंख फिरता है. उस सीन में दोनों को बेहद रोमांटिक expression निकालने थे के.आसिफ को पता था कि मधुबाला ऐसे सेन करने अपने पापा-अताउल्ला खान- के सामने सामने सहज नहीं हो पातीं थी. इसीलिए के. आसिफ ने एक आदमी को उसके पास भेजा. उसने अताउल्ला खान को दारु और जूए में उलझाए रखा, वो जानबूझकर हारता रहा. उसमे करीब २५ हजार रूपये खर्च हुए.
* एक पत्रिका को दिया साक्षात्कार में हंक रणदीप हुड्डा ने स्वीकार किया है कि वो आस्ट्रेलिया में एक लडकी के प्यार में पड़ा था, और गिगालो तक बनने के लिए तैयार हो गया था. उसका बयान-"आस्ट्रेलिया में ३-४ साल तक नायोबी नाम की लड़की से मेरा रिश्ता रहा ............मैंने तमाम तरह के ओड जोब्स  किये डोर-टू-डोर सेल्स, बार टेंडर, टेक्सी चलाने का काम .......मैंने गिगोलो तक बनने कि कोशिश की जिसके तहत एजेंट ने मुझे एक जोड़े के पास जाने को कहा और मैं तुरंत चिल्ला पडा कि ये क्या बकवास कर रहे हो? फिर मैं उसे थैंक्यू वैरी मच कहकर वहां से चलता बना"
*१८९८ ई० में १२०० रूपये के बदले अंग्रेजों को  सुतुनुती, कलिकता,और गोविंदपुर नामक तीन गांवों की जमींदारी मिल  गई  थी.

Saturday, September 25, 2010

डिग्री जरूरी या ज्ञान

सफलता को हासिल करने के लिए क्या चीज जरूरी है??????????
जब मैं छोटा था तो माँ पापा हमेश पढाई पर जोर  दिया करते थे. कहते थे कुछ बनना है तो खूब पढो. आगे बढ़ना है तो खूब पढो. मैं भी कोशिश करता था. ये  जुदा बात है कि मैंने पढाई में कोई तुर्रा नहीं जड़ा. ले दे कर स्नातकोत्तर भी हो गया. एक बार और कर लूँगा मजे मजे में, मगर  पक्की बात है कि  मेरी रोजी- रोटी में मेरी डिग्री का सहयोग ना के बराबर है. मुझे नहीं लगता कि आगे भी होने  वाला है. यार अगर सफल लोगों की जिन्दगी का पोस्टमार्टम किया जाये तो पता चलेगा कि वो जिस क्षेत्र में कामयाब हुए उसकी डिग्री उनके पास नहीं थी\है. कुछ के पास तो कोई डिग्री ही नहीं है. चलिए जितनो को मैं जानता हूँ उनकी लिस्ट आपके सामने प्रस्तुत कर देता हूँ.
*पहले अमिताभ बच्चन की बात करते है. भारतीय फिल्म उद्योग के इस  मेगा स्टार पास अभिनय कि कोई डिग्री नहीं है वो graduate जरूर है सुना है वो कोलकाता में जॉब करने के साथ स्टेज से जुड़े थे और बहुत बुरे एक्टर मने जाते थे( शायद उनकी तकनीक के हिसाब से )
* बिल गेट्स =>दुनिया का सबसे अमीर आदमी साक्षात्कार में स्वीकार कर चुका है कि उसे कॉलेज जाने का मौका नहीं मिला
* मुकेश अम्बानी => भारत के इस  सबसे अमीर आदमी  के पास bussiness  कि कोई डिग्री नहीं है. उसके पास कैमिकल इंजीनिअर कि डिग्री है. वो mba करने के लिए लन्दन गया जरूर था मगर एक साल बाद ही अपमे पिता कि मदद करने के लिए लौट  आया था.
* अनिल अग्रवाल =>इस भारतीय उद्योगपति के पास सिर्फ दसवी पास का सर्टिफिकेट ही है.
*अजीम प्रेमजी=> भारत के पूर्व सबसे अमीर आदमी के पास भी कोई bussiness की कोई डिग्री  नहीं है. वो bba करने के लिए लन्दन गए जरूर गए थे लेकिन पिता कि मौत कि वजह से बीच में ही लौट आए थे
 * सुरेन्द्र मोहन पाठक =>हिंदी के व्यावसायिक रूप से बेहद सफल लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक  B.Sc. पास है.
* राज कपूर => शो मैन के नाम जाने जाने वाले इस  फिल्म मेकर दसवीं फेल बत्ताए जाते है. उन्होंने फिल्म मेकिंग की पढ़ाई किसी भी संस्थान से नहीं की थी.
*कार्लोस स्लिम=> दूरसंचार किंग के पास गणित की डिग्री बताई जाती है.
* सम्राट अकबर=> इस महान शासक के बारे में सब जानते है कि वो अनपढ़ था.उसका खुफिया तंत्र बहरत के इतिहास में सबसे बेहतर माना गया. उसने कितने मजबूत शासक वंश कि स्थापना कि सब जानते ही है.
और कितने उदाहरण दूं यार मेरे जैसे ठप्प बन्दे को इतना पता है...........तो जब आप किताबें खंगालेंगे तो आपको बहुत सारे उदाहरण मिल जायेंगे.
असली बात ये है हनी कि अगर वो लोग बिना डिग्री के अपने काम में इतने सफल क्यों हुए ?????????????
अगर इस मुद्दे पर लिखा जाये तो पूरा ग्रन्थ लिखा जा सकता है लेकिन मैं ज्यादा स्पेस ना लेकर टू द पॉइंट बात करूंगा.
असल बात ये नहीं है कि जो लोग बिना डिग्री के ही सफल हुए इसका मतलब ये नहीं उन्हें ज्ञान नहीं था. उन्हें अपने कर्मक्षेत्र में गजब  का ज्ञान था.
अकबर भले ही अनपढ़ था मगर वो अपने पढ़े लिखे कारिंदों के ग्रंथो क पढवाकर  सुनता था ज्ञान कि उसमे बहुत बूख थी. कई ग्रन्थ तो उसके जुबानी ही याद थे.
अजीम प्रेमजी भी मार्केट में आई बिसनेस मेनेजमेंट की हर किताबको पढ़ते है.
ज्यादा बाल की खाल ना निकलते हुए मैं बस यही कहूँगा कि सफल होने के लिए उन लोगों ने जी तोड़ मेहनत की. जांमारी वाले कम किये. रिस्क लिए और नया करने कि कोशिश की.पुरानी मान्यताओं को टाक में रखकर नया काम किया. पता है जब हम कोई कोर्स  करते हैं तो हमे एक निश्चित पैटर्न पढ़ाया जाता है.वो पैटर्न भी कई साल पहले तैयार किया गया होता है और उसे बाद मैं कई सालों के बाद अपडेट किया जाता है. तब तक उस सब्जेक्ट मैं बहुत से बदलाव आ चुके होते है. दूसरी बात ये है कि कॉलेज के पढाई और प्रक्टिकल में जमीन आसमान का फर्क होता है. साथ ही संस्थान में पढ़ लेने के  बाद बन्दा अपने आप को पूर्ण समझने लगता है, इसी वजह से वो नयो चीजो को सीखना या तो बंद कर देता है या बहुत कम कर देता है. वो भूल जाता है कि आजकल लाइफ बहुत तेज है हर पल कोई ना कोई नयी खोज होती ही रहती है. बाजार में टिकने के लिए अपडेट करते रहना पड़ता है.........और मार्केट में आगे बढ़ते रहने के लिए खुद कोई ना कोई नया काम करते रहना होता है. कामयाब लोग वो ही करते है.
मेरा मानना है कि कामयाब होने के लिए डिग्री नहीं ज्ञान कि जरूरत होती है. साथ ही काम पर फोकस करना होता है. नया करते रहना होता है .........अगर नाकाम हो जाये तो भी प्रयत्न करते रहना होता है. लगतार मेहनत करते रहना होता है.जिस दिन थके समझ लो अप मार्केट से बाहर हो जाओगे.

Monday, August 23, 2010

अशनी बियानी says

अशनी बियानी सुपुत्री किशोर बियानी ने एक bussiness अखबार में दिए साक्षात्कार  में  कहा-" dont forget i am a Marawari.Even now, we use yesterdays left-over  vegetables for tomorows `parathas`. so i watch the cost in whatever i do"
=>क्या बात है!!!!!!!
कोई रात की सब्जी के परांठे खाकर अरबपति बन जाये तो क्या बुरा है यार............सीखो नालायको सीखो.

संसाधन का संरक्षण करना मारवाड़ियों से सीखो

Sunday, August 22, 2010

fact file3

* अमिताभ बच्चन का बायाँ कन्धा झुका होने कि वजह कोई स्टाइल नहीं है....उसकी वजह बाएं कंधे के ट्रेपियम को पकड़कर रखने वाली मांसपेशियां नहीं है.
बच्चन साहब ने अपने गले के ट्यूमर को निकालने के लिए स्टुडेंट लाइफ में एक  २ ऑपरेशन करवाए थे और तीसरा ऑपरेशन अपनी नौकरी के दौरान कोलकाता में करवाया था तब गलती से ऐसी नस कट गयी थी जो कंधे कि मांसपेशी को पकडे रखती है.
* `इन्कलाब' फिल्म में हाथ में बंधा रुमाल कोई स्टाइल नहीं थी बल्कि कुछ दिन पहले बच्चन साहब का ऑपरेशन हुआ था और हाथ पर बंधी पट्टी को छिपाया गया था
` शराबी' फिल्म में पूरी ज्यादातर फिल्म में हाथ जेब में था वो इसी वजह से था.
*१९८३ की विश्व विजेता टीम के manager पी. आर.मानसिंह ने एक पत्रिका को दिए intervew में टीम के लोगों के द्वारा adult फिल्म देखने की बात स्वीकार की है.
घटना इस प्रकार है......"प्रेक्टिस के बाद लड़के बस से होटल जा रहे थे. बस में विडियो पर  adult फिल्म देख रहे थे . अचानक हमे साइरन की आवाज सुनाई देने लगी देखा तो ट्रेफिक पुलिस की कई गाड़ियाँ हमारी बस के आगे पीछे थी. लडके घबरा गये .............झटपट लड़कों ने केसेट, वीडियोबंद करके, छुपाई"

Thursday, May 20, 2010

२६\११ का हीरो

तारीख-२६ नवम्बर २००८।
दस आतंकवादी समुन्द्र समा की चोकसी को भेदकर मुंबई के पार्क कफ परेड के सामने भंडारकर मच्छीमार कालोनी पहुंचे। ११ A.K.-47, 834 A.K.-47 कारतूस ६५ मैगजीन, १० पिस्तोल, २१ मैगजीन, ९५ कारतूस, ९ हथगोले २४ किलो RDX से लैस। एक चुस्त अचूक कुशल और जटिल योद्धिक कार्रवाही के लिए पूरी तरह तैयार।
वहाँ से वो जब अपना ख़ूनी तांडव शुरू करने के लिए निकले तो पूरी मुंबई ही नहीं, पूरा देश क्या पूरी दुनिया हिल गयी। शहर में मझगाँव डाकयार्ड और विले पार्ले इस में धमाका किया गया।इस पूरी कार्रवाही में १७३ लोग मरे जिसमे १०० भारतीय थे बाकि विदेशी थे, तकरीबन ३०८ लोग घायल हो गए। तारीफ़-ऐ-काबिल होसला हमारे जवानों ने भी दिखाया और बड़ी तेजी के साथ उस स्तिथि पर काबू पा लिया।
अगर इस हमले की समीक्षा की जाये तो साफ समझ में आता है कि ये एक फिदाइन हमला था उन दस लोगों का मकसद का इंडिया में आकर तबाही मचाना था तब ताका तबाही मचाते रहना था जब तक वो मर न जाएँ। वेसे इस सच को कसाब भी स्वीकार कर चूका है। ............ उनका मकसद था विदेशों में इंडिया कि छवि को धूमिल करना-ताकि वो इंडिया आने से, यहाँ व्यापार करने से डरें -जिससे इंडिया के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचे।इसीलिए उन लोगों ने विदेशियों को चुन-चुनकर मारा, ये कहकर मारा कि इंडिया अब उनके लिए सुरक्चित नहीं है। उनका मकसद सिर्फ तबाही मचाना ही नहीं था बल्कि लम्बे समय तक तबाही मचाना था ताकि वो मीडिया में छाए रहें और लोगों के दिलों में ज्यादा से ज्यादा डर पैदा हो। सच तो ये है कि वो अपने मकसद में काफ्ही हद तक कामयाब भी रहे थे।
सब जानते हैं की उसके बाद इंडिया के पर्यटन को कितना बड़ा धक्का लगा। दूसरे- जिस कदर इंडिया की प्लितिच्स में उथल पुथल मची थी ये सब जानते है। सबसे बड़ी बात ये है कि वो दस के दस हीरो बन चुके है। कैसे?????????
चलिए इस घटना को दूसरे नजरिये से देखते है। ........... दस `जांबाज' फिदाइन इंडिया कि सुरक्षा व्यवस्था को तोड़कर इंडिया की आर्थिक राजधानी में पहुंचे और वहां तबाही मचानी शुरू कर दी।जांबाजों ने ६० घंटों तक शहर की पुलिस और इंडिया की फोज को धता बताई और लगातार क़त्ल-ऐ-आम मचाते रहे। उन जाबांजो को काबू में करने लिए इंडिया की फोज को अपनी सबसे बेहतरीन टुकड़ी को लगाना पडा तब भी वो उन पर ६० घंटे तक भारी पड़े। उन्होंने सारे देश में दहशत की लहार पैदा कर दी। उन सबने अपने इस मिशन के लिए अपनी अपनी जान दे दी बस एक जांबाज जिन्दा बचा- वो जांबाज है आमिर अकमल कसाब। जिसकी सुरक्षा के लिए इंडियन सरकार २०० करोड़ रूपये हर महीने खर्च करती है.............ये सब जानकर कट्टरपंथी समुदाय के लोगों के लिए कसाब का कदकितना ऊंचा हो गया होगा-क्या ये किसी ने सोचा है??????? शायद लोग भूल गए कि ज्यादातर लोग उसकी ओर आकर्षित नहीं होते जो अच्छा काम करता है बल्कि उसकी ओर आकर्षित होते हैं जो बड़ा काम करता है। अपनेलिए नए फिदायीन तईय्यार करने के लिए हमारे दुश्मनों को कितना बड़ा सहारा मिला है शायद ही किसी ने सोचाहो। ये सब जानकार जाने कितने मासूम लड़के कसाब बनना चाहेंगे ताकि उन्हें भी इतिहास में जगह मिले ओरउन्हें जन्नत नसीब हो।
हमारा महान मीडिया भी उनके कारनामे को लगातार दिखता रहा। लोगों के आंसू देखकर पकिस्तान में बैठे उनलोगों कि मुस्कान के बारे में किसी ने नहीं सोचा जो हिन्दुस्तानियों को रोता हुआ देखना चाहते है। मैं तो कहता हूँ येबताना ही नहीं चाहिए था कि वो कोण थे। कुछ पागलों ने मुंबई में कत्लेआम मचाया ओर वो मारे गए या पकडेगए। जो पकड़ा गया उससे सब उगलवाओ और एक्शन लो। ये तो पक्की बात है अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में जाकर कोईफायदा नहीं होने वाला है। कश्मीर मुद्दा लेजाकर इंडिया देख चुका ही है।
अबकी स्थिति देखो सजा को सुनाने से पहले कसाब कितना नोर्मल सब जानते है। वो नोर्मल क्यों था क्योकि उसेपता था कि उसे मौत कि सजा मुश्किल होगी। उसे इतना यकीन क्यों था क्योकि वो जानता था कि इंडिया काक़ानून कितना लचीला है। प्लस उसके सपोर्ट में यहाँ भी लोग मौजूद है।
खैर उसे सजा तो हो गई है पर उसे फंसी पर लटकाया कब जायेगा लटकाया जायेगा भी या उसे भी माफ़ कर दियाजाएगा या उसका भी मामला राष्ट्रपति जी कि अदालत में पेंडिंग पड़ा रहेगा???? वैसे अब पाकिस्तान केस कोअंतर्राष्टीय कोर्ट में ले जा रहा है। वहां की होगा। जब अमेरिका सद्दाम को तय तारीख से पहले फांसी पर लटकासकता है तो हम क्यों कायदों का राग अलाप रहे है। लगाओ उसे फांसी-इन्तजार किस बात का है????? हम यानहीं कर सकते देश तबाह हो जाये हम कायदों से नहीं डिगेंगे। कायदे का इस्तेमाल करके ये शैतान भले ही हीरो बनजाये। भले ही मरने वालों के परिवार के लोग खून के आंसू बहते रहे ........पर कायदों से नहीं डिगेंगे क्यों डिगें भैयाहम तो अहिंसावादी है। एक थप्पड़ खाकर दूसरा गाल आगे करने वाले बापू की औलाद है।
कुछ भी हो कसाब को सजा मिले ( जो अभी अनिश्चित है ) या न मिले - वो जेहाद जैसे पवित्र नाम पर खून बहानेवालो के लिए हीरो बन चुका है। आखिर एक देश को दहला देने वाले लोगों के ग्रुप का इकलोता जिन्दा बंदा है। उसकी सुरक्षा के लिए २०० करोड रूपये महीने खर्च होते है। मीडिया उसे प्रचार दे ही चुका है सरकार सजा देने मेंसक्षम नजर नहीं आ रही।

Monday, April 12, 2010

some facts 2

* अगर आप youtube पर लोड की गयी सभी videos को देखनेव लगें तो तमाम videos देखने में आपको तकरीबन ६०० साल लग जायेंगे youtube पर हर मिनट में २० घंटे की videos upload ki जाती है।
*इब्न-बतूता का जन्म २४ फरवरी १३०४ को मेरिडीन राजवंश के दोरान मोरक्को के तंजोर शहर के एक मुस्लिम विधिवेत्ता के घर में हुआ था।
*फिल्म `पिरान्हा-२:दा स्पानिंग`के दोरान director जेम्स केमरून के निर्माता के साथ एडिटिंग को लेकर इतने मतभेद हुए कि उन्हें डरावने सपने आने लगे थे कि भविष्य से मशीन मानव सिर्फ और सिर्फ उन्हें मारने आ गया है .....
यही सपना उनकी हिट फिल्म `the tarminator` की कहानी का बेस बना।
*विश्व के ११० देशों में २.५ करोड़ से भी ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते है। अमेरिका में ३८% डोक्टर, १२५ scientists, 36% nasa workers भारतीय मूल के है। microsoft में 34% I.B.M. में, २८% इंटेल में, १७% कर्मचारी भारतीय मूल के है।
* वर्ष २००९ के best director का oscar award जीतने वाली निर्देशक केथरीन बिगेलो ने अपने पूर्व पति जेम्स केमरून (अवतार के निर्देशक ) को पछाड़कर वो खिताब जीता है।
*महान नाटककार जयशंकर प्रसाद जी ने अपने प्रसिद्द नाटक `चन्द्रगुप्त` की प्रस्तावना में सिद्ध किया है कि`कामसूत्र` के लेखक `वात्स्यायन` और चाणक्य एक ही आदमी थे
चाणक्य द्वरा लिखित ग्रन्थ है - चाणक्य नीति, अर्थशास्त्र, कामसूत्र, और न्यायभाष्य।

Wednesday, March 31, 2010

some facts 1

*इंडिया १५ अगस्त को आजाद हुआ था लेकिन उसे united national organigation ka member 30-10 1945 को बना लिया गया था
मेरी समझ में नहीं आ रह की अगर ये सच है तो ३०-१०-१९४५ इंडिया को एक आजाद देश का दर्जा मिल गया होगा- तो कांग्रेस देश को आजाद करने का क्रेडिट क्यों लेती है??????
*आधुनिक जासूसी के पितामह wilhelm johann kark eduard stieber जो बिस्मार्क का मुख्य जासूस था जब १८९२ में मरा था तो यूरोप के तमाम सामंत उसकी अंतिम यात्रा में शामिल होने आये थे। इसलिए नहीं की वो उसे बहुत प्यार करते थे बल्कि इसलिए क्योंकि वो खुद देखना चाहए थे की क्या वो सचमुच ही मर गया है या मरने का ड्रामा कर रहा है।
*लेखक गुरुदत्त ने ५५ साल की उम्र में लेखन कार्य शुरू किया था।
*एक magazine ने हाल ही में रिपोर्ट पुब्लिश की है जिसमे बताया गया है की बिहार में कई जगहों पर लड़की वाले दहेज़ से बचने के लिए जबरन लडको का अपहरण करके बन्दूक की नोक पर उनकी शादी अपनी लड़की से करवा रहे है।
*james bond 007 के लेखक Ian Flaming खुद वास्तव में ब्रिटिश नोसेना के ख़ुफ़िया विभाग में जासूस थे। उन्होंने हिटलर के दाहिने हाथ कहे जाने वाले जर्मनी के डेपुटी फ्यूहर को डिफेक्ट करने पर मजबूर कर दिया था।
=>डिफेक्ट का मतलब गद्दारी करके दुश्मन के खेमे में शामिल हो जाना होता है

Wednesday, February 17, 2010

प्यार का funda

सुना है प्यार काफी शानदार `शै` है ।ये हैवान को इन्सान बना देता है । प्यार इंसान को अमर बना देता है। प्यार जेवण को स्वर्ग बना देता है
पर मुझे कभी ऐसा कुछ नजर नहीं आया। वजह शायद ये हो ली मैं आज तक एक भी लड़की नहीं पटा सका। पटाना तो दूर तवज्जो तक हासिल नहीं कर सका । ये अलग बात है की कोशिश बहुत की । बार- बार नाकाम होकर भी आशा जरूर है शायद कभी न कभी चिता पर लेटने से चार पाँच मिनट पहले ही सही मुझ गधे को पंजीरी खाने को मिल ही जाये ।हा-हा-हा-।
चूँकि अपुन ने प्यार का स्वाद चखा नहीं सो अपुन की भेजे में प्यार का फंडा घुसा ही नहीं । इस बारे में अपुन ने सोचा तो प्यार की रूमानियत के पीछे पंगे, बदनामी, तकलीफे, ही नजर आयी या वक्ती झाग या कमीनापन या वो बेवकूफी जिसे दिल की सुनकर कर चुकने के बाद ........रिपीट - कर चुकने के बाद .............दिमाग की अत्कार सुनने को मिलती है। जेहन में बस उबलते पछतावे के लावे में आत्मा को जलना होता है।
* क्या प्यार हैवन को इंसान बना देता है ??????
अगर ऐसा है तो क्यों प्रपोजल स्वीकार न करने पर लड़कियों के चेहरे पर दिलजले तेज़ाब फेंक देते है ????? क्यों लोग प्यार में हत्याए कर देते है??????????????
*क्या प्यार जिन्दगी को जन्नत बना देता है ????
हमारे गाँव में एक लड़का था । घर का लाडला माँ बाप के खिलाफ लव मेरिज की बाध्य दिमागदार मन जाता था। शादी के बाद लाइफ का बैंड तो बजा ही जिन्दगी भर उसकी बीवी लडकियों को यही कहती रही की कोई उसकी तरह न करे।
*क्या प्यार इबादत है?????
शायद हो । सवाल ये है ----लड़के- लडकिय एक दूजे के प्यार को पाने के लिए माँ- बाप का प्यार क्यों भूल जाते है। माँ बाप की सालो की ममता पर उनका `प्यार` क्यों भारी पड़ता है??? क्या ये प्यार माँ-बाप की सालों की तपस्या से बड़ी चीज है???? और अगर है तो क्यों बाद में आशिक पछताते है?? क्यों २६% लव मेरिज करने वालो ने अपने विवाहेत्तर सम्बन्ध की को स्वीकार किया है ।ध्यान दें की बस स्वीकार किया है जिन्होंने नहीं माना वो जरूरी नहीं पाक-साफ़ हों । इसके अलावा एक बात मेरे में पैदा भी होती है । प्रेमियों बुरा मत मानना यारो-अगर कोई अपने पैदा करने वालों के लिए ही संवेदनशील नहीं तो वो अपने spouse के प्रति ईमानदार कैसे हो सकता है ?????? जिसने उन माँ-बाप की भावनाओ की कद्र नहीं की -जिन्होंने उन्हें पाला-पोसा, पढाया,उसकी केयर की- वो अपने spouse की फीलिंग्स की क्या क़द्र करेगा???? ये सोचकर मेरा दिमाग भन्ना गया । आत्मा ने कहा की प्यार नाम की कोई चीज दुनिया में होती ही नहीं ।
ये तो हुई वो बात जो मैंने देखा और सुना अब अपनी बखिया उधेड़ता हूँ । वैसे तो मैं बड़ा कमीना इंसान हूँ लेकिन हमेशा से कमीना इंसान नहीं था मुझे पहली बार जो लड़की पसंद आई या लिखू में खुद ही जिस लड़की की तरफ खीचा चला गया वो मेरे सामने सातवीं कक्षा में आई तब मैंने सोचा काश ये मेरी बहन होती ये न होती तो इसी के जैसी होती ...........सचमुच बड़ी cute लगती वो मुझे थी (यार अब भी काफी क्यूट है )और में हमेशा एक प्यारी सी बहन की ख्वाहिश करता था। और बाद में ............ । उसी की सहेली पर नजर टिकी और मैं उसपर लाइन मारने लगे ...सोरी `प्यार' करने लगा उसे। क्यों?? क्योंकि तब मैं अपनी लाइफ पार्टनर की कल्पना करने लगा गया था। मामला उसी तक नहीं टिका कईओं पर लाइन मारी। मार रहा हूँ। एक बुक स्टाल पर कभी कभार बैठकर किताबें चाटता हूँ हर सब्जेक्ट पर। वहां मुझसे अच्छे standerd ki बड़ी धांसू-धांसू लडकियां किताब लेने आती हैं। वहां जब किसी सी इंटरेक्ट करने का मोका आता है तो दिल में आवाज उठती है बस भैया ना कह दे। वैसे पता है की कोई भाव नहीं देगी कभी भी भाव नहीं देगी लेकिन `भैया' सुनकर दिलपर आरी सी चल्री है। क्यों .........ये भी कोई पूछने वाली बात है यार?????????
सवाल ये है की मैंने प्यार किसे किया -उसे जिसे अपनी बहन बनाना चाह ( हालांकि उसके लिए शायद मैं अब भी बुरा इसान होऊ ) या उसे जिसपर पहली बार लाइन मारी या उन्हें जिनपर लाइन मार रहा हूँ या उन्हें जिनपर लाइन मारने वाला हूँ क्योंकि तय है की कोई भाव नहीं देने वाली आगे तो बढ़ना ही पड़ेगा न आखिरकार।
वैसे भाइयों ऐसा नहीं है की प्यार करने वाले नाकाम ही होते है। हमरे एक प्राचार्य जी ने भी सुना है लव मेरिज की थी दोनों कामयाब भी थे और खुश भी थे। celebtities की लव मेरिज की खबर तो सब पढ़ते ही रहते है साथ ही रिश्ता टूटने की भी न्यूज़ आप तक आती रहती ही है काफी जोड़ियाँ कामयाब भी रही है। पर , अब भी मेरा मानना यही है की ये जोडियाँ इसलिए कामयाब नहीं की उन्होंने `प्यार' किया बल्कि इस वजह से कामयाब है की उन्होंने रिश्ते की कीमत को समझा और निभाया। उन्होंने `प्यार' के आसमान में परवाज तो भरी मगर रिश्ते की हकीकत की जमीन पर भी पैर टिकाये रखे।
दोस्तोंअब मैं `प्यार' के अपने funde पर आता हूँ । मैं हमेशा की तरह अब भी ताल ठोककर कहता `प्यार' नाम की कोई चीज इस दुनिया में नहीं होती। होता है या तो रिश्ता या फिर महज आकर्षण। हम अच्छी चीज की तरफ आकर्षित होते है और तब तक उसकी और आकर्षित रहते है जब तक वो अच्छी और आकर्षक बनी रहे । जबकि रिश्ता बस रिश्ता होताहै वो कभी ख़त्म नहीं होता कोई ताकत रिश्ते को मिटा नहीं सकती। अब ये हमारी सोचा है - हम आकर्षण के गुलाम बनते है या साश्वत रिश्ते को जीते है। ख़ुशी क्या है रेगिस्तान में भी लोग आशियाना बनाकर ख़ुशी को अपना गुलाम बना लेते है वहां हरियाली पैदा कर देते है वर्ना कश्मीर जैसी जन्नत को हम ही इंसानों ने आतंक से जहन्नुम बना दिया है वहां की वादिय तो बस खामोश है ।
हो सकता है मेरा funda आप लोगो को पसंद ना आये या हो सकता है की मैं भी किसी खास लड़की को बहुत importance देता होऊ उसी की वजह से और लड़कियों को पास ही न आने देता होऊ ताकि `उसके' लिए जगह खाली बनी रहे (यार इतना झूठ तो चल जाता है हा-हा-हा-हा) किन्तु ये तय है -अगर मजबूरी वश या दुर्घटना वश शादी की तो मेरी बीवी ही सबसे ज्यादा important होगी सबसे सेक्सी होगी नहीं होगी तो मैं बना दूंगा ।
वैसे एक बात पक्की है की जब तक शादी जैसी दुर्घटना मेरी लाइफ में नहीं घटती जब तक किसी हसीना ( हसीं तो पक्की होगी ही) मेरे साथ बंधकर नहीं फूटते तब तक मैं लाइन मरता रहूँगा । दिल लगाकर बिना spaceship के चाँद पर लैंड करने की कोशिश करता रहूँगा आखिरकार इन फालतू कामो का अपना ही मजा है। वैसे भी guys अगर हम लफंगे लड़कियां पर लाइन नहीं मारेंगे तो उन्हें अपने हसीं होने का अहसास कैसे होगा ?????? और क्या पता कोई हसीना बेवकूफ बनकर मुझे धाकड़ बंद मान ले और मेरे भाग्य का पिटारा खुल जाये। वैसे भी किसी को हसीं होने का अहसास कराना भी क्या कम धर्म-कर्म का काम है?????????? सो भाइयो अपुन का इरादा धर्म-कर्म से पीछे हटने का जरा भी नहीं है मैं तो करता रहूँगा आप बोलो आपका क्या इरादा है?????

Tuesday, January 12, 2010

sex scandle की चांदनी

एक हैं tiger woods. स्टार है। आज कल चर्चा मैं है भाई साहब अपनी कार मे सफ़र कर रहे थे एक पत्रिका में रखी अपनी girlfriends की तस्वीरे देख रहे थे -अन्तरंग टाइम वाली । एक टक्कर हुई और सारी तश्वीरें बिखर गयी और बात मीडिया तक चली और पोल खुल गई। भाई साहब बदनाम तो हुए साथ ही अब बीवी भी साथ छोड़कर जा रही है मामला कोर्ट में जाने वाला है।
खैर
मामला अब ये है इस scandle का फायदा किसे हुआ ???
कहते है जब रात में चांदनी बरसती है तो समझदार लोग उसे जमकर लूटते है और लूटी भी यार जैसे -
१- भाई साहब तब `ग्रेट अ ग्रिप ऑफ़ फिजिक्स - पढ़ रहे थे तब तक वो कुल ही २२६८ बिकी थी अब तक ४००००० के आस पास बिक चुकी है।
२ - जिस कार में बैठे थे उसकी बिक्री का आंकड़ा दोगुना हो चूका है
3- प्रेमिकाओ की sudh ले लेते है
i- जेमी ग्रेब्स एक वेट्रेस थी अब वो १० लाख डॉलर- लेकर playboy के कवर पर आने वाली है ऐसा सुना है
ii- रशल ( एक क्लब के vip सेवाओ की director ) और बैर पूल लांग की मार्केटिंग director कलिका मेकिन अब तक परसिद्ध हो चुकी है।
iv -porn stars holly simpson और joslin james की मार्केट में इजाफा हो ही चूका होगा।
v- मीडिया तो चांदी काट ही रहा है
अब पत्नी की बात करते है । दुनिया की कोई पत्नी नहीं जो अपने पति के एब न जानती हो खासकर तब - जब बन्दे के कई चक्कर चल रहे हों । पत्नी ने तलाक की बात तब क्यों नहीं की ??????
तब उसे शायद पैसा मिलने की गारंटी न हो अब पक्के तोर पर गारंटी ज्यादा है सो तलाक लाइन की बात कर रही है

मेरा इरादा वूड्स भैया को दूध का धुला प्रूव karna नहीं जो गलत है वो गलत है ही
यार मेरी समझ में आज तक ये नहीं आया की लोग कई औरतों के साथ रिश्ता कैसे बना लेते है ????????
एक औरत की शारीरिक जरूरत मर्द से ज्यादा होती है
डाटा उठा लो
एक सर्वे के अनुसार ९०% औरतों ने कहा की वो अपनी sexual life se satisfied हैं उनमे से मात्र २०% ने कहा की ओ पूरी तरह satisfied है। manaa ये भी जाता है की औरत की शारीरिक जरूरत मर्द से आठ गुनी होती है । बहुत औरतों को तो orgasm की जानकारी ही नहीं होती उन्हें orgasm कभी मिला होगा तभी तो उसके बारे में पता होगा ना यार।
तो मेरे भाइयो एक की जरूरत तो पूरी नहीं होती लोग दूसरियों के चक्कर में क्यों आ जाते है ????????